हिमाचल प्रदेश का शाब्दिक अर्थ होता है, बर्फ से ढका हुआ क्षेत्र। हिमाचल प्रदेश भारत के उत्तर पश्चिम में स्थित एक छोटा सा राज्य है। यह सामान्यत: काफी ठण्डी जलवायु वाला क्षेत्र है। अधिक उंचाई वाले क्षेत्रों में काफी बर्फबारी होती है। जबकि कम उंचाई वाले क्षेत्र जिनकी सीमा पंजाब से लगती है, वे सामान्यत: काफी गर्म क्षेत्र हैं। हिमाचल का कुल क्षेत्रफल 55,673 वर्ग किलोमीटर है। समुद्र तल से हिमाचल की ऊंचाई 350 मीटर से 7026 मीटर है
राजधानी - शिमला
कुल क्षेत्रफल - 55,673 वर्ग किलोमीटर
कुल जनसंख्या - 68,64,602 (2011 की जनगणना के अनुसार)
कुल जिले - 12
साक्षरता दर - 83.78%
लिंगानुपात (Sex Ratio) - 972/1000
राज्यसभा सीटें - 3
लोकसभा सीटें - 4
विधानसभा सीटें - 68
हिमाचल प्रदेश के जिले
मंडी
कुल्लु
कांगड़ा
किन्नौर
चम्बा
Bilaspur
हमीरपुर
सोलन
लाहौल-स्पीती
शिमला
सिरमौर
उना
राजधानी - शिमला
कुल क्षेत्रफल - 55,673 वर्ग किलोमीटर
कुल जनसंख्या - 68,64,602 (2011 की जनगणना के अनुसार)
कुल जिले - 12
साक्षरता दर - 83.78%
लिंगानुपात (Sex Ratio) - 972/1000
राज्यसभा सीटें - 3
लोकसभा सीटें - 4
विधानसभा सीटें - 68
हिमाचल प्रदेश के जिले
मंडी
कुल्लु
कांगड़ा
किन्नौर
चम्बा
Bilaspur
हमीरपुर
सोलन
लाहौल-स्पीती
शिमला
सिरमौर
उना
हिमाचल प्रदेश की नदियाँ
हिमाचल प्रदेश में छोटी-बड़ी अनेकों नदियाँ है, ये नदियाँ पर्वतीय क्षेत्रों में मौजूद ग्लेशियरों से निकलती हैं। फिलहाल इस आर्टिकल में हम केवल संक्षिप्त परिचय ही दे रहे हैं, नदियों पर detailed article अलग से लिखा जायेगा, जिसमे आपको हिमाचल की नदियों की पूरी जानकारी मिलेगी।
1. सतलुज
सतलुज हिमाचल प्रदेश की प्रमुख नदियों में से एक है, यह तिब्बत में मानसरोवर झील से निकलती है। भारत में सतलुज किन्नौर में शिपकी नामक स्थान से प्रवेश करती है। हिमाचल में सतलुज मुख्यत: किन्नौर, बिलासपुर और शिमला में बहती है, तत्पश्चात सतलुज पंजाब में प्रवेश करती है।
2. व्यास
व्यास का उद्गम हिमाचल प्रदेश में रोहतांग दर्रे से होता है। यह कुल्लू से होती होती हुई मंडी जिले में प्रवेश करती है, उसके बाद काँगड़ा में प्रवेश करती है। उसके बाद पंजाब में प्रवेश करती है। हिमाचल का मंडी नगर व्यास के किनारे पर स्थित है।
व्यास का उद्गम हिमाचल प्रदेश में रोहतांग दर्रे से होता है। यह कुल्लू से होती होती हुई मंडी जिले में प्रवेश करती है, उसके बाद काँगड़ा में प्रवेश करती है। उसके बाद पंजाब में प्रवेश करती है। हिमाचल का मंडी नगर व्यास के किनारे पर स्थित है।
3. चिनाब
चिनाब हिमाचल प्रदेश में लाहौल-स्पीती जिले से निकलती है। दरअसल, चिनाब चंद्रा और भागा नामक दो नदियों के मिलने से बनती है। चंद्रा और भागा नदियाँ तांदी नामक स्थान पर मिलकर चिनाब का निर्माण करती हैं। लाहौल-स्पीती से निकलने के बाद चिनाब चंबा से होते हुए जम्मू-कश्मीर में प्रवेश करती है।
चिनाब हिमाचल प्रदेश में लाहौल-स्पीती जिले से निकलती है। दरअसल, चिनाब चंद्रा और भागा नामक दो नदियों के मिलने से बनती है। चंद्रा और भागा नदियाँ तांदी नामक स्थान पर मिलकर चिनाब का निर्माण करती हैं। लाहौल-स्पीती से निकलने के बाद चिनाब चंबा से होते हुए जम्मू-कश्मीर में प्रवेश करती है।
4. रावी
रावी नदी हिमाचल की धौलाधार पर्वत श्रृंखला (काँगड़ा जिले की मुल्थन तहसील) में "बड़ा भंगाल" से निकलती है। चंबा नगर रावी के किनारे पर स्थित है।
रावी नदी हिमाचल की धौलाधार पर्वत श्रृंखला (काँगड़ा जिले की मुल्थन तहसील) में "बड़ा भंगाल" से निकलती है। चंबा नगर रावी के किनारे पर स्थित है।
5. यमुना
यमुना उत्तराखंड में यमुनोत्री ग्लेशियर से निकलती है। हिमाचल में पोंटा साहिब और ताजेवाल से होकर हरियाणा में प्रवेश करती है।
यमुना उत्तराखंड में यमुनोत्री ग्लेशियर से निकलती है। हिमाचल में पोंटा साहिब और ताजेवाल से होकर हरियाणा में प्रवेश करती है।
हिमाचल प्रदेश की रियासतें और उनके संस्थापक
रियासत संस्थापक स्थापना वर्ष
मंडी बाहू सेन 1200 ई0
कहलूर वीर चंद चंदेल. 900 ई0
गुलेर हरी चंद 1405 ई0
सिब्बा शिवराम 4500 ई0
नालागढ़ रियासत अजय चंद 1000 ई0
कहलूर वीर चंद चंदेल 900 ई0
चंबा रियासत मेरु वर्मन 550 ई0
सुजानपुर घमंड चंद -
नूरपुर जेतपाल 1000 ई0
सुकेत वीर सेन 1200 ई0
बलसन अलोक सिंह 1200 ई0
दरकोटी दुर्गा सिंह -
कुम्हारसेन किरत चंद 1100 ई0
देलथ पृथ्वी सिंह -
ठियोग जय चंद 1667 ई0
जुब्बल कर्णचंद -
क्योंथल गिरी 765 ई0
सिरमौर सुभंश प्रकाश 1195 ई0
जसवां पूर्ण चंद 1170 ई0
कुनिहार अभोज देव 1154 ई0
महलोग बीर चंद 1170 ई0
डाडा सिब्बा सिवर्ण चंद 1550 ई0
हिमाचल प्रदेश के मुख्य पर्वत शिखर और उनकी उंचाई
पर्वत चोटी - समुद्रतल से उंचाई (मीटर) - स्थिति/जिला
शिल्ला - 7,026 मीटर - किन्नौर
लियो पारजिल (रियो फरग्याल)- 6,791 मीटर - किन्नौर
शिपकी - 6,608 मीटर - किन्नौर
मनीरैंग - 6,597 मीटर - लाहौल स्पीती
मुलकिला - 6,520 मीटर - लाहौल स्पीती
किन्नर कैलाश - 6,500 मीटर - किन्नौर
डिबीवोकरी - 6,400 मीटर - कुल्लु
गेफांग - 6,400 मीटर - लाहौल स्पीती
शिगड़ी ला - 6,230 मीटर - लाहौल स्पीती
इन्द्रासन - 6,220 मीटर - कुल्लु (मनाली)
शिकर बेहु - 6,200 मीटर - लाहौल स्पीती
मुकर बेहु - 6,070 मीटर - लाहौल स्पीती
गेफांग गो - 6,050 मीटर - लाहौल स्पीती
िदयो टिब्बा - 6,001 मीटर - मीटर कुल्लु
सोलांग - 5,975 मीटर - कुल्लु
मेवा कान्दिन - 5,944 मीटर - कुल्लु
पीर पंजाल - 5,972 मीटर - चम्बा
हनुमान टिब्बा - 5,860 मीटर - कुल्लु कांगड़ा
बड़ा कंदा - 5,860 मीटर - चम्बा (भरमौर)
कैलाश - 5,660 मीटर - चम्बा (भरमौर)
शालतू दा पार - 5,650 मीटर - लाहौल स्पीती
परांगला - 5,579 मीटर - कुल्लु
उमाशिला - 5,294 मीटर - कुल्लु
शितिधार - 5,290 मीटर - कुल्लु
श्रीखण्ड - 5,182 मीटर - कुल्लु
तमसर - 5,080 मीटर - चम्बा
लछालंगला - 5,060 मीटर - लाहौल-स्पीती
मुरांगला - 5,060 मीटर - लाहौल-स्पीती
श्रींगला - 4,999 मीटर - लाहौल-स्पीती
इन्द्रकिला - 4,940 मीटर - कुल्लु
पिनपार्वती - 4,800 मीटर - कुल्लु
घोरालन्तिनु - 4,760 मीटर - कुल्लु-कांगड़ा
पतालसू - 4,470 मीटर - कुल्लु
चांशल - 4,267 मीटर - शिमला
गौरी देवी का टिब्बा - 4,030 मीटर - चम्बा
हरगारण - 3,850 मीटर - लाहौल स्पीती
नरसिंह टिब्बा - 3,730 मीटर - लाहौल-स्पीती
चूड़धार - 3,647 मीटर - सिरमौर
साचा - 3,540 मीटर - कुल्लु
चोलांग - 3,270 मीटर - कांगड़ा

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